Autumn special { उड़ता जा रहा है | }
उड़ता जा रहा है | वृक्ष से विभक्त पत्तियों की करुण सरसराहट, शायद ना कोई सुन पा रहा | सब से कहना बहुत कुछ चाह रहा| पर ना जाने कोई नहीं सुना पा रहा | स्मरण कर उन सुखद लम्हों को.... जो तरु सह बताये थे | ग्रीष्म शरद की तपन सरद को .. अपने आगोश मे छपाये थे| वर्षा धरती- अम्बर के प्यार को मिल बाट पाया था | दुख- शुख मे यूही मखरते जा रहे थे बचपन से योवन तक के सफ़र मे वृक्षों ने जो, प्रेम अभाश कराया था | मात्र स्मृती बन मस्तिक मे उतर आया है| कुछ क्षण मात्र और जीने में अब इन्ही का सहरा है | इस बिछड़न में भी देखो तो तीव्र वेदना है | अपितु सहता जा रहा है... मुख पर मंद - मंद मुस्कान लिये .... हवा संग उड़ता जा रहा है | उड़ता जा रहा है | 11-10-2k17 शिवम् मिश्रा