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पेन

पेन पेन तो एक बहाना था हमे तो किसी नये सफ़र पर साथ    जाना था | रोज बात –बात पर हमारा लड़ना हो    ही जाता था | पर    एक दुसरे को कोई न    मनाता था हर रोज की तरह    हमारा    यू हे मिलना और मिलाना था बिना कहे किसी की बात को जान जाना था लाइफ के इस पहलू मे हम को यू हे खिल्खिलाना था | इस मोमेंट    से भी हम को गुजर जाना था फ़िर हम दोनों को अलग –अलग    हो जाना था उन बहतरीन लम्हों को लिये हमे सफ़र मे आगे बढ़ जाना था   पेन तो सिर्फ बहाना था |

himachal yatra part 1

इन पहाड़ो मे कुछ बात है, जो हर साल मुझे अपनी और आकर्षित करती है | तो कुछ इस तरह शरू हुआ हमारा हिमाचल   का सफ़र छोटे छोटे  पहाड़ ने हमारा स्वागत कुछ इस तरह  से  किया | “ छोटे वृक्ष अब विशाल चीर के वृक्ष में तब्दील हो चुके थे | टेढ़ी-मेढ़ी पग्दंद्दी पर  इठलाती  बल खाती गाड़िया, सूरज के किरणों वृक्षों के पतों से छन कर मनो अनेकों- अनेक रत्न के भांति प्रतीत हो रहे हो और    मनो उन रत्नों  हमारा अभिषेक किया जा रहा हो| बडे -२ विशाल बांस के झाड़ मनो दिल खोल कर आदर-सत्कार कर रहे हो | जगह- जगह बंदर की छोटी व चमकीली आँखों मे हमारे आने की खुशी दिख रही थी| पीपल की झुकी  डलिया मानो किसी बुजुर्ग की तरह आशीष दे रहे हो|  फिर शाम  को 5 बजे मंडी पार करने क बाद एक ओठ कस्बे  मे पहुचे जहाँ पैर हमारा व्याश नदी से रुबरुब  हुआ उसकी कल कल कल करती नाद ने मनो हमारे सफ़र की सारी थकान दूर कर दी| कुछ क्षण के  ठिठोलियो करने के  बाद  हमारा  धयान  प्रकृति के चित्रकार द्वारा बनाया गया विभिन्न विभिन्न कला कृतिया आकर्षण का ...
वो संस्कारी थी ,जब तक सहती रही बत्तमीज हो गयी, जब बोल पड़ी | that girl was culture till she was suffering , but pervert when she spoken out