पेन
पेन
पेन तो एक बहाना था हमे तो किसी नये सफ़र पर साथ जाना था |
रोज बात –बात पर हमारा लड़ना हो ही जाता था |
पर एक दुसरे को कोई न मनाता था
हर रोज की तरह हमारा यू हे मिलना और मिलाना था
बिना कहे किसी की बात को जान जाना था
लाइफ के इस पहलू मे हम को यू हे खिल्खिलाना था |
इस मोमेंट से भी हम को गुजर जाना था
फ़िर हम दोनों को अलग –अलग हो जाना था
उन बहतरीन लम्हों को लिये हमे सफ़र मे आगे बढ़ जाना था
पेन तो सिर्फ बहाना था |
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