शहादत
शहादत !! 14 फरबरी का दिन शहादत का ये मेरे अपने जवानों की गाथा का देश की रक्षा करने का बेडा जिन्होने उठाया था ये l घर से दूर कुछ ही गये ये अपनी – वादों को कर के चले ऋण चुकाने मात्रभूमि की खातिर शहादत मे शरीक होने चले ये l मौत था मेघ का चादर ओढ़, ओठ था बरसात की लेकर आया ये R.D.X के वज्रपात के खंजर से था जवानों को, आगोस मे सुलाया l आज लिपट तिरंगो मे देखो ये अपने – अपने घर को लौट गये , ऋण चुका कर ये वीर सपूत दिन शहादत का हमे सौप गए l