Libash

लिबास
बचपन से अभी तक  लिबास बदलते गए
स्कूल –कॉलेज प्रोफेशन के हिसाब से ढलते चले गये
समय के मौसम के हिसाब से ढलते चले गए
लोगो के आचार विचार मे बसते रह गए l

प्रोमोशन के हिसाब से रंगों के मायाजाल मे,
बस पाने की होड़ मे लग गईl
कुछ ओर कुछ ओर पाने की हट मे
यही लिबास सफ़र सफर पर  बदलती चली गयी

हमारे लोगो को परखने  के अंदाज मे
अच्छे बुरे के पहचान में
सत्य -असत्य के पेमाने    मे
लिबास नहीं मनो चेरेक्टेर् सर्टिफिकेट  बन गये

मुल्को मुल्के के हिसाब से
 राज्यों -राज्यों  मे बदल कर रह गयी 
इतिहास को हे नहीं बल्कि 
भविष्य का भी अनुमान  बताने लगी

ऊँच-नीच अमीर –गरीब नीता –राजनेता
की परख लिबास से होने लग गयी
यहाँ तक की रंगारंग वैदिक कार्यकर्म के अनुरूप
सुख –दुखो के अनुरूप बन कर रह गयी

पल पल मे लिबास बदलता चला गया
जीवन के अन्तिम पालो मे 
देह रूपी  लिबास छोड़ कर 
अमरता के  लिबास को पाना है



Comments

  1. Libass new upcoming poem ... 🍁
    It's my perseption regarding clot's and the
    meaning Hope u it will change the vison of people regarding clothes.👚👚👘👗🧥

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