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Showing posts from December, 2016

2k20&2k21( निकल गये  है हम |)

निकल गये   है हम | लो एक और शाम गुजर गई  चलते–चलते नए  साल में बदल गए नए मंजिल को थामे,    हम भी राह मे आगे निकल गए   | अनेको से मिलते चले हम   कुछ   नए से मिलने चले नए पुराने खेल को फिर से सुलझाने चले | रह गए थे जो स्वपन अपूर्ण साकार करने चले प्रकति व लोगो के सहयोगी सह आगे सदैव बढते चले | फिर उसी प्रकति की ऊँगली थामे                 नए सफ़र के लिये   निकल गए    |                  शिवम्   मिश्रा

हिंदी दिवस स्पेशल !!!

मातृभाषा की वेदना | एक रात्रि के पहर मुझसे मिलने अभ्यागन्तु आई, मैने पुछा आप कौन?.   प्रतिउत्तर आया|   मै हिंदी| . वेदना से भरी वृतांत मैने थे मैने उन   से सुने| मैं राट्रभाषा हिंदी तुम्हारी, जो अंग्रेज़ी की बैड़ियो से   हु बंधी| देश को तो आजाद   कराया था पर तुम भूल गए मुझे आजाद करवाना| वो ले गए मुझे पकड़ कर जिसे तुमने अभी तक नही आजाद करवाया | क्यों तुमने ऐसी है   दुर्गात्ति मेरी बनायी ? हो रही है मेरे ही देश मै मेरी बदनामी, नतमस्तक की जगह हू, कुचली जा रही , क्या बर्दास्त करते रहोगे यू मेरी बदनामी? मै तो थी मातृभूमि सी प्यारी| क्यों मेरे हे देश से कर दिया मुझे निष्काशिस? मै तो थी, मंत्रमुग्ध करने वाली | मेरे आस्तित्व पैर है ये आज संकट का साया| क्यों मेरे तिलक का   वरण छोड़ विलायती कनटोप लगया ? क्यो???......... क्यो???........ ...... क्यो???...... उस रात्रि के पच्छात मैने भी तनिक विचार ... मातृभाषा के संदर्भ म जिसके शायद हम सब है, अपराधी हम सब है, अपराधी.... शिवम् मिश्रा

one of the chidhood memories .....

बड़ी शुहावनी शाम थी | बड़ी शुहावनी शाम थी हम और हमारे मित्र साथ थे पगदंद्दी बड़ी सुनसान थी   हम   रास्ते से   अनजान थे मित्र ने था   अनुमान लगाया जो हमे   प्रॉब्लम मे ले आया घर से   दूर भयानक जंगल था   पहुचाया तरह तरह के वातावरण से था घिहराता दर से था हमारा   जी घबराया दिल मे   आया खौफ का साया अब वापस जाने का ख्याल भी चौका सा   जाता | सूरज भी था जो छुपने को आया.. अब तो चारो तरफ था संन्नता थोड़ी दूर दौड़ कर   पगडण्डी बदली मुलाकात हुई सज्जन से   जिन्होने था रुब-रुब कराया| जाना था अल्फ़ा चले   जा रहे थे सेक्टर बीटा, हमारा सर   चकराया ,हमने नजर इधर उधर   दौड़ाया एक कुटी दूर नजर आई   | पहुचते ही हमने था द्वार खटखटाया | निकल उसमे से एक देवी आई जिन्होने थे हमे दौ –दौ   चपत लगाये| .............................................. पता चला हम तो थे नींद से जागे हमारी मम्मी ने थे वो दौ चपत लगाये | कहा इतनी देर से हू, उठा रही स्कूल का समय हो आया | ...