one of the chidhood memories .....
बड़ी शुहावनी शाम
थी |
बड़ी शुहावनी शाम थी हम और हमारे मित्र साथ थे
पगदंद्दी बड़ी सुनसान थी हम रास्ते
से अनजान थे
मित्र ने था अनुमान
लगाया जो हमे प्रॉब्लम मे ले आया
घर से दूर भयानक
जंगल था पहुचाया
तरह तरह के वातावरण से था घिहराता
दर से था हमारा जी घबराया
दिल मे आया खौफ का
साया
अब वापस जाने का ख्याल भी चौका सा जाता |
सूरज भी था जो छुपने को आया..
अब तो चारो तरफ था संन्नता
थोड़ी दूर दौड़ कर
पगडण्डी बदली
मुलाकात हुई सज्जन से जिन्होने था रुब-रुब कराया|
जाना था अल्फ़ा चले जा
रहे थे सेक्टर बीटा,
हमारा सर चकराया ,हमने
नजर इधर उधर दौड़ाया
एक कुटी दूर नजर आई |
पहुचते ही हमने था द्वार खटखटाया |
निकल उसमे से एक देवी आई
जिन्होने थे हमे दौ –दौ चपत लगाये|
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पता चला हम तो थे नींद से जागे
हमारी मम्मी ने थे वो दौ चपत लगाये |
कहा इतनी देर से हू, उठा रही
स्कूल का समय हो आया |
शिवम् मिश्रा
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