हिंदी दिवस स्पेशल !!!
मातृभाषा की वेदना |
एक रात्रि के पहर मुझसे मिलने
अभ्यागन्तु आई,
मैने पुछा आप कौन?. प्रतिउत्तर आया| मै हिंदी|.
वेदना से भरी वृतांत मैने थे मैने
उन से सुने|
मैं राट्रभाषा हिंदी तुम्हारी,
जो अंग्रेज़ी की बैड़ियो से हु बंधी|
देश को तो आजाद कराया था पर तुम भूल गए मुझे आजाद करवाना|
वो ले गए मुझे पकड़ कर जिसे तुमने
अभी तक नही आजाद करवाया |
क्यों तुमने ऐसी है दुर्गात्ति मेरी बनायी ?
हो रही है मेरे ही देश मै मेरी
बदनामी,
नतमस्तक की जगह हू, कुचली जा रही ,
क्या बर्दास्त करते रहोगे यू मेरी बदनामी?
मै तो थी मातृभूमि सी प्यारी|
क्यों मेरे हे देश से कर दिया मुझे
निष्काशिस?
मै तो थी, मंत्रमुग्ध करने वाली |
मेरे आस्तित्व पैर है ये आज संकट
का साया|
क्यों मेरे तिलक का वरण छोड़ विलायती कनटोप लगया ?
क्यो???......... क्यो???........
...... क्यो???......
उस रात्रि के पच्छात मैने भी तनिक
विचार ...
मातृभाषा के संदर्भ म जिसके शायद
हम सब है, अपराधी
हम सब है, अपराधी....
शिवम् मिश्रा
Comments
Post a Comment