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अद्भूत अतुलनीय व अविश्म्रनीय“तुंगनाथ, चोपता, उतराखंड”

उखीमठ ,देवरी ताल , सारी, चोपता , तुंगनाथ ,चंद्रशिला “I USED TO TARVEL IN DARK, SO THAT I CAN DISCOVER CITY IN LIGHT “ तुंगनाथ की यात्रा नियति द्वारा नियमित किया गया अत्यंत और अलोकिक सफ़र रहा l सफ़र 26 दिसम्बर की रात को डेल्ही से उखीमठ को चला I सुबह 3 बजे म ऋषिकेश पहुचा l सच मे यह उत्तरांचल को जेसे देव भूमि कहा गया है, पुराण मे भी इसका वर्णन है l पूर्णतय सत्य वचन l सुबह 10 बजे 1 बस उखीमठ के लिये रवाना होती है जो बीच बीच मै देवप्रयाग,श्रीनगर, रुद्रप्रयाग से होते हुए उखीमठ पहुचती हैl ऋषिकेश से उखीमठ का सफ़र अत्यन रमणीक रहाl कभी-कभी छोटे गावों और सदैव विभिन- विभिन वृक्षों से पूर्ण उत्तराखंड के पहाड़ अपनी उपस्थिति जाहिर कर रहे थे, और तो और पूरे रास्ते मे माँ गंगा का सहयोग, वह तो अपने पूर्णत्य कल कल ध्वनि  करती हमारा मनोरंजन कर बहती जा रही है  l  ऋषिकेश से जब हम देव प्रयाग पहुचे तो वहां का नजारा अत्यन ही विलाक्क्षण से भरा था l देवप्रयाग एक क़स्बा  है, तेहरी गडवाल मे l पंच प्रयाग के अलकनंदा नदी मे जहाँ अलकनंदा और भागीरथी नदी का संगम होता है और वहां से गंगा नदी का प्राकट्य होता ह...