patti (leave)

 पत्ती

फिर  टूट गई पत्ती डाल से कहती, थी जीना चाहती हु |
पर शायद यह नहीं हो पाया दरंदगी जीवन के युद्ध में
कर  दिया उसे  वीरगति पर मजबूर
वितेरासना ने घेर कर किया उसे दूर
उसने भी स्वपन संजोये थे |
कोशिश थी पर रह गए अपूर्ण
वह काली रात्रि वह घनघोर घटाए
दरंदगी जीवन के युद्ध का वहीभतश्य  साया
दरंदगी नकाब ओढ़ था आया |
मौत का परचम लहराया
हार गए जिन्दगी, ले गए बजी दरंदगी |
अंत समय सहाश का था आयाम
फिर मौत जीवन का हुआ संग्राम
जिस ने पल पल था मौत से कहराया
नाजुक पल था वह आया
जीन्दगी ने भी अंत मे हाथ छुड़ाया
विलुप्त सी हो गई वह कहा
फिर हनन हुई जिन्दगी
शर्मशार हुई मानवता
टूट कर वह  पत्ती डाल से
आखिर जगा गए जन हुनकार |
                              शिवम् मिश्रा
                              26th jan


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