कलाकार #आर्टिस्ट

कलाकार तू क्यों अस्त हो गया |

रख रहा संभाल कर कृतिया तेरी

जो अब इतिहास बनने को है  तेरी
किये केसे ऐसे अथक कर्म तुने

बताओ  न क्यों मूक  बन  कर रहे  देरी |

समक्ष मेरे पड़ी है कृतिया
जो वृतांत कह रही  है तेरी

रंगों का अलग भ्रम है
चाहो ओर बिखरा सा यह क्षण है |

ब्रश का वो स्ट्रोक अधुरा है

मेरे घर का वो कोना भी सुना है
पीछे मुड कर भी देख रहा

सह यात्री  का वो अहसास भी अधुरा है |
तुने हर मार्मिक पालो को सहलाया है

मेरे यौवन में तेरा तेरा ही आसरा है

क्यों आज रंगों भरी दुनिया मै
मात्र श्वेत रंग का परचम लहराया है |

अम्बर के कैनवस पर लाल रंग की प्रतिमा बन रही है
काली रंग का चादर ओढ़ शाम है  भी है लौट रही  

रंगीन दुनिया का कलाकार तू
क्यों रंगों मे विलीन हो गया |

चल उठ कुछ सोच ले
आ अब हम कुछ बोल ले

बहुत हुआ रूठाना मानना
चल अब कुछ हम दोनों कुछ रचे |
.............

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