साइकिल


साइकिल

ढूढ  रहा  हु, वो शहर अपना खली सड़के- नीले अस्मा सा 
जिन पर कही टनटनाह साइकिल की हुआ करती थी |
हर रेड लाइट पर  जमघट इन्ही की हुआ करती थी
गैंग मे जब  ये  इस पार से उस पार हुआ करती थी|
जिन्दगी तो तब बसर हुआ करती थी
जब साइकिल हुआ करती थी |

हर घर महोला की जो कभी शान ये
शनि –इतवार को ये भी धुला करती,`
तेल से मालिश इनकी भी  हुआ करती थी |
और तो और अपॉइंटमेंट इनके लिये भी  लिये जाया करती थी
टेस्ट ड्राइव के लिये ये  सरपट दौड़ा करती थी
जब साइकिल हुआ करती थी|


टहलने के बहाने साइकिल  को साथ ले
शर्दी गर्मी  व वसंत को पिछले बिठा मजिले तय करती थी 
अपनी सेहत का राज को पैडल से घुमा 
सहर्ष बारिश की बूंदों को बाहे मे स्वीकार लिया करती थी
और  शाम को अरमानो का टोकरा बांध घर साथ लौट जाया करती थी |
जब साइकिल हुआ करती थी ....
$M_22.4.14

Comments

Popular posts from this blog

jiya😀

Vrindavan A uncertain Road Bike trip & Invitaion of Shri Bankey Bihari ji!!(14th feb)