यश- गान
ना खुद को नापो कद से,
अपना खुद का यश गान बनो
इस जीवन में खुद के लिए शान बनो
बुझा मसाल ना खुद को समझो
अपना खुद का आग बनो
इस अंधकारमय संसार के दीपक अंशुमान बनो
चंद बूंदों वर्षा की ना समझो खुद को
स्वयं खुद की के मेघ बनो तुम
इस धारा के उद्धारक इन्द्र बनो
कैद ना खुद को समझो
संचालन स्वयं का खुद करो तुम
इस जन्म के इतिहासकार व सौरवान बनो।
ना खुद को समझो तुम तुच्छ मानव
स्वयं के उद्धारक कृष्ण बनो तुम
अपने मया के बल पर इस भारत का अभिमान बनो ।
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