चला में 15/11/2021

 लोगो की तरह सपने ले कर चला मै।
चले ओर भी सब को संभालने लगा मे 
सुख़ दुख में हमदरद बन आगे बढ रहा मै
कुछ पाने की चाह में चल रहा मै

आस जीत का लेकर  बढ रहा हु में
रंग बदलते इस जाहन मे रंगो में रंग रहा मे
अच्छे बुरे की परख कर सबो से मिल रहा में
संस्कारों का दमनो से खुद को रहा बचा में

भागती रफ्तार मे अब भागने लगा हु मे
भरोसे की नाव थाम लगा समंदर पार मे
चार लोगो की कश्ती पर हू आज सवार मे
हुनर का चप्पू थाम कर रहा समंदर पार मै
समंदर  की लहरों को बना अपना यार मै 

आश विश्वास  व त्राश मे हो जाता संग्राम ये
पल पल विश्वास में रखना आश ये
जो साथ चला रहना उसका साथ में 
आज हार है साथ तो जश्न भी होगा बाद मे।


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