Ajent एजेंट

 एजेंट 


कल एक छोटा बन्दा आया, मेरे पास
लेकर गया | ढेर सारी खुशिया मुझसे उधार
और बाँट दिया सबको बिना लिये कोई चार्ज
ना –सोचा ना समझा यार |
मेने उससे पुछा क्या कर रहे हो यार|
उसने बोला,  इन्वेस्मेंट है यार इन्वेस्मेंट
वो भी इंसानियत की यार
जो भूल चुके है लोग आज
आज मुनाफा ही लोगो का आजेंडा है |

इंसानियत  को बाट रहा हु मै यार
बाट – बाट  दोगुना कर रहा हु यार
इस संसार मै नए  स्कीम को लांच
कर रहा हु
मै तो  हु एजेंट एक  मात्र

जो खुशियों के साथ इंसानियत बाँट रहा हू 
शिवम् मिश्रा |

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